भारत-रूस व्यापार को अब आर्कटिक के रास्ते नया समुद्री विकल्प मिल सकता है. Northern Sea Route पर 2026 के अंत तक MoU की तैयारी है, जबकि 2027 में पहली संयुक्त पायलट यात्रा प्रस्तावित है.