मोहन भागवत ने कहा, "हमें अलग-अलग रहने की जरूरत नहीं है. हम साथ चल सकते हैं. हम साथ काम कर सकते हैं. हम साथ रह सकते हैं और हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए. यही हिंदुत्व है."