जनगणना अधिकारियों को इस लिस्ट को छांटने में कई साल लग गए. लंबी मशक्कत के बाद उन्होंने देखा कि कौन सी सच में अलग भाषाएं हैं और कौन सी एक ही भाषा के अलग-अलग स्थानीय नाम हैं.