धर्म पर कट्टरता का पर्दा इस कदर पड़ गया है कि कभी 'अल्ला मियां हमरे भैया को दियो नंदलाल' जैसे सोहर गाने वाला और मस्जिद के सामने रामलीला कराने वाला हमारा समाज आज भाषा, त्योहारों में बंट चुका है.