हाई कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर यह बात मानी कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बिना वैधानिक अनुमति के बनाए गए धार्मिक ढांचे कानून की नजर में अवैध निर्माण होते हैं, ऐसे निर्माण को केवल धार्मिक आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता, खासतौर पर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ हो.