भारत में किसी की नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है. नागरिकता से संबंधित किसी भी विवाद का निपटारा 'नागरिकता अधिनियम' के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है. ये पूरी तरह से केंद्र सरकार का विषय है. राज्यों के पास इस पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं.