पति-पत्नी की इच्छा के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने को लेकर भारतीय कानून और अदालतों की व्याख्याओं में लंबे समय से मतभेद रहे हैं. पिछले कई महीनों में आए चार हाईकोर्ट के फैसलों ने इस कानूनी बहस को और जटिल बना दिया है. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने को तैयार हो गया.