सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों और युवाओं के आंदोलन के प्रति अपनी संवेदनशीलता से जोड़कर पेश किया. उसने परोक्ष रूप से यह संकेत भी देने की कोशिश की कि उसका फैसला विपक्ष के राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि छात्रों की नाराजगी को दूर करने और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में उठाया गया कदम है.