कर्नाटक HC ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए बढ़ाया गया आरक्षण रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि 2022 का यह कानून SC द्वारा तय की गई 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा का उल्लंघन करता है.