लोग हमें हमारे काम, हमारे परिवार, हमारी सफलता, हमारी असफलता, हमारे रिश्तों और हमारी पहचान से समझते हैं. लोग हमारे बारे में वाक्य बनाते हैं. धीरे-धीरे हम उन्हीं वाक्यों को सच मानने लगते हैं.