अगली बार जब आप भरोसे से भारत की बेरोजगारी दर सुनें, तो शायद उसके ठीक बाद एक और, शांत सवाल पूछने लायक है. यह नहीं कि कितने लोग बेरोजगार हैं, बल्कि यह कि कितने लोगों को गिना जाना ही बंद हो चुका है.