ऋषिकेश के वीरभद्र महादेव मंदिर में हुए धार्मिक समारोह में जापान के दो साधकों को संन्यास दीक्षा के बाद महामंडलेश्वर बनाया गया. दोनों साधक बालकुंभ पुरी महाराज की शिष्य परंपरा से जुड़े बताए जाते हैं.