इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में साक्ष्यों और पीड़ित बयानों में गंभीर विसंगतियों के कारण तीन आरोपियों को बरी कर दिया. अदालत ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की बात कही.