पितृपक्ष का प्रत्येक दिन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का पावन अवसर होता है, लेकिन जब तृतीया तिथि के साथ भरणी नक्षत्र का संयोग जुड़ जाता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.