आज चुनाव में जाति को मुद्दा बनाया जाता है, लेकिन 1963 के जौनपुर उपचुनाव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जाति को मुद्दा बनाने से साफ इंकार कर दिया था. जो आज भी मिसाल है. पढ़ें पूरा किस्सा.