कुछ गांवों में जब कोई महिला प्रधान चुनी जाती है, तो उसके पति उसके नाम पर असली फैसले लेने लगता है. शोधकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस समस्या को एक नाम दिया है, 'प्रधान पति'.