100 साल बाद कोई हमारे आज के समय को समझना चाहेगा. उसे कानून, भाषण, आंकड़े, तस्वीरें और अखबार मिल जाएंगे. लेकिन क्या उसे पता चलेगा कि हमारे घरों के भीतर और हमारे अपने भीतर क्या हो रहा था?