एडिशनल सॉलिसिटर ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने इस गलत आधार पर सजा पर रोक लगाई थी कि लालू ने अपनी सजा का 50 फीसदी हिस्सा पूरा कर लिया. सजा पर रोक के लिए पहले की 2 अर्जियां खारिज कर दी गई थीं जबकि तीसरी अर्जी को तथ्यात्मक रूप से गलत आधार पर मंजूरी दी गई थी.