सरकार की ओर से खुद ही यह स्वीकार किया गया था कि एक ग्रुप अकेले मणिपुरी ट्रकों से महीने में करीब 3 करोड़ रुपये कमा रहा था. उग्रवादियों के कंट्रोल वाले इलाकों में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को अक्सर अपनी महीने की सैलरी का करीब 1% "टैक्स" भरना पड़ता है.