मोहन भागवत ने कहा कि जहां सीधा काम हो रहा हो, वहां ज़्यादा बोलने की ज़रूरत नहीं होती. इसलिए, भाषण जरूरी नहीं है, काम ही जरूरी है. उन्होंने कहा लोग भाषण भूल जाते हैं, लेकिन याद रहता है.