धीरेंद्र शास्त्री ने जेन-जी को तेज गति वाली पीढ़ी बताया. उन्होंने युवाओं को संस्कार और विचारों में संतुलन बनाने की सलाह दी. स्वतंत्रता से अपनी बात रखने पर जोर दिया. मर्यादा बनाए रखने की सीख भी दी.