बंगाल में मछली संस्कृति के गहरे महत्व को उजागर करती है, जहां वैष्णव ब्राह्मण भी इसे 'जल तरोई' मानकर खाते हैं. ये शाक्त मत और दुर्गा पूजा से जुड़ा है, जहां मांसाहार स्वीकार्य है.