पितृपक्ष में हर तिथि का अपना अलग महत्व माना जाता है. उसी के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है. इसी क्रम में दशमी तिथि को जिन पूर्वजों का निधन हुआ था, उनके लिए दशमी श्राद्ध किया जाता है.