पश्चिम बंगाल उपचुनाव से 18 दिन पहले ममता गुट की कैंडिडेट संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। संचिता ने नाम वापसी को लेकर लेटर भी जारी किया। संचिता ने इससे पहले बंगाल सीएम शुभेंदु से मुलाकात की थी। ममता ने संचिता को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी मैदान में बने रहेंगे। ममता ने 13 सितंबर को दोनों कैंडीडेट के नामों को ऐलान किया था। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खाली की थी। रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को चुनाव होगा, रिजल्ट 9 अक्टूबर को आएगा। संचिता का नामांकन वापसी का लेटर… नाम वापसी के बाद आगे क्या…5 सवाल-जवाब में समझें… सवाल: उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद अगला कदम क्या होगा? जवाब: नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी करेगा। सवाल: क्या नाम वापस लेने वाला उम्मीदवार अपना फैसला बदल सकता है? जवाब: नहीं। एक बार नाम वापसी वैध तरीके से हो जाने के बाद उसे वापस लेकर फिर चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होती। सवाल: अगर एक सीट पर कई उम्मीदवार मैदान में बचे हैं तो क्या होगा? जवाब: सभी बचे हुए उम्मीदवारों के नाम अंतिम सूची में शामिल होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार मतदान होगा। सवाल: अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है तो क्या होगा? जवाब: ऐसी स्थिति में चुनाव निर्विरोध हो सकता है। रिटर्निंग ऑफिसर प्रक्रिया पूरी कर उस उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित करता है। सवाल: क्या नाम वापसी के बाद नया उम्मीदवार खड़ा किया जा सकता है? जवाब: नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद नए उम्मीदवार को उसी चुनाव में नामांकन दाखिल करने का मौका नहीं मिलता। बंगाल में दो सीटों पर उपचुनाव, TMC के दोनों गुट को नया नाम-सिंबल चुनाव आयोग ने TMC के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न मिला है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है। इससे एक दिन पहले आयोग ने दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाला मूल चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था। यह अंतरिम व्यवस्था है। मूल नाम और चिह्न पर अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। अब दोनों गुट उपचुनाव में नई पार्टी नाम और सिंबल से चुनाव लड़ेंगे। नंदीग्राम TMC और भाजपा, दोनों के लिए अहम सीट नंदीग्राम लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 में ममता ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। अधिकारी BJP में शामिल होने के बाद TMC के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया। अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… दावा-ममता के 20 बागी सांसदों में 17 भाजपा में जाएंगे: यूसूफ पठान सहित तीन का बाहर से समर्थन ममता बनर्जी से अलग हुए TMC के 20 बागी सांसदों में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या बाद भाजपा में शामिल होंगे।न्यूज एजेंसी पीटीआई ने कूच बिहार सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के हवाले से यह खबर दी। रविवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में बसुनिया ने दावा किया कि हम 17 सांसद एक साथ BJP में जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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September 18, 2026 at 10:35 AM
बंगाल में नंदीग्राम उपचुनाव से हटीं ममता बनर्जी की प्रत्याशी:CM शुभेंदु से मुलाकात के बाद नाम वापस लिया; 6 अक्टूबर को वोटिंग
Dainik Bhaskar