मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने के मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट के नरम रवैए पर मौखिक टिप्पणी की और कहा कि कहीं न कहीं सीमा तय करनी होगी.