8 मार्च 1921 को जनमें साहिर ने 25 अक्टूबर 1980 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। लेकिन उनकी शायरी का सफर उनकी जिंदगी के साथ खत्म नहीं हुआ। आज उनकी पुण्यतिथि पर जानिए कि आखिर एक शायर ने अपने शब्दों से कैसे समाज को आईना दिखाने में मदद की।