कीनिया में एक पादरी के बेटे ने बताया कि कैसे उस पंथ में बच्चों को भूखा रखा जाता था, उन्हें पढ़ाई से दूर रखा जाता था और विरोध करने पर पीटा जाता था. पादरी लोगों को ‘यीशु से मिलाने’ के नाम पर बच्चों को भूखा रखने के लिए कहता था.