यह समारोह एक साथ तीन शताब्दियों का उत्सव था. माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी, अखंड दीप और गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष भी इसी अवसर पर मनाए गए. हजारों प्रशिक्षित साधकों ने इसमें हिस्सा लिया.