गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि हिंदी का दूसरी भारतीय भाषाओं से कोई मुकाबला नहीं है। यह अलग-अलग भाषाओं के बीच संवाद और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली कड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता कमजोरी नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत है। शाह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारें 2029 से पहले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह के भाषण की 5 बड़ी बातें 1. आजादी के बाद भारतीय भाषाओं की भूमिका शाह ने कहा- आजादी के बाद भारतीय भाषाएं राष्ट्र निर्माण, प्रशासन और विकास को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बनीं। हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं ने जनजागरण, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता के आदर्शों को आगे बढ़ाया। 2. हिंदी से सीधे जुड़ते हैं आम लोग- गृह मंत्री ने कहा- मेरी मातृभाषा गुजराती है। लेकिन जब मैं देश के किसी भी कोने में जाता हूं, तो वहां के आम लोगों से सीधे जुड़ने वाली भाषा हिंदी होती है। 3. गैर-हिंदी भाषी महापुरुषों ने भी दिया योगदान- शाह ने कहा- स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी, फिर भी उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखा। महात्मा गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाली भाषी थे, फिर भी उन्होंने आजाद हिंद फौज में हिंदी को संवाद की भाषा बनाया और देश को ‘जय हिंद’ का नारा दिया। 4. औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का जिक्र- गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से औपनिवेशिक मानसिकता की गुलामी से मुक्ति का आह्वान किया है। भाषा इस स्वतंत्रता को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 5. कानूनों में बदलाव को राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा- शाह ने आगे कहा कि राजपथ को कर्तव्य पथ में बदलना केवल नाम बदलना नहीं था। अंग्रेजों के बनाए आपराधिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लाए गए। यह केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव की पुनर्स्थापना है। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…