विज्ञान आज दिमाग, स्मृति और चेतना को समझने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक विज्ञान ने यह साबित नहीं किया है कि हमारी व्यक्तिगत यादें या हमारी चेतना शरीर की मृत्यु के बाद उसी रूप में जीवित रहती हैं.