अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या संगठन के दबाव में कुछ नेता पुत्र अपने कदम पीछे खींचते हैं या फिर 29 सितंबर को आरसीए की पिच पर नेता पुत्रों के बीच आर-पार का मुकाबला देखने को मिलेगा.