जॉन ब्रिटास ने CJI से अनुरोध किया कि पत्र को उपयुक्त पीठ के समक्ष विचारार्थ रखा जाए और संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत आवश्यक न्यायिक कार्रवाई पर विचार किया जाए.