17 साल की उम्र में लक्ष्मण सिंह ने लापोड़िया गांव का टूटा तालाब संवारने के लिए पढ़ाई छोड़ दी. उस गर्मी में शुरू हुआ काम उनके जीवन का रास्ता बन गया.