महात्मा गांधी के ब्रह्मचर्य प्रयोग और असी धार व्रत एक गहन चर्चा का विषय रहे हैं. इन प्रयोगों को गांधीजी ने अपनी अहिंसा की कसौटी के रूप में देखा, जिसका आधार प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों की परंपरा थी.