सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए CJP छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच कर रही हाई-पावर्ड एनक्वायरी कमेटी (HPEC) को फिर से गठित करने की मांग खारिज कर दी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि कमेटी पर आपत्तियां अभी समय से पहले हैं, क्योंकि उसने जांच अभी शुरू ही की है। कोर्ट ने कहा कि HPEC को लेकर लगाए गए आरोप महज अनुमान पर आधारित हैं। बेंच ने कहा कि कमेटी का गठन निष्पक्षता और पारदर्शिता के उच्च मानकों के साथ कोर्ट की सहायता के लिए किया गया है, न कि किसी एक पक्ष का समर्थन करने के लिए। 18 अगस्त को बनी थी 5 सदस्यीय कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को पांच सदस्यीय HPEC का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी को जंतर-मंतर और अन्य जगहों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग और सुरक्षा बलों के खिलाफ हुई हिंसा के आरोपों की जांच करनी है। कमेटी सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करेगी और कोर्ट की निगरानी में काम करेगी। पहले इन मामलों की जांच करेगी कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने HPEC को सबसे पहले पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित हिंसा और उत्पीड़न, दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच करने को कहा है। प्रदर्शन से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों पर कोर्ट उचित समय पर फैसला करेगा। गवाहों की पहचान गोपनीय रखने का निर्देश कोर्ट ने कमजोर और संवेदनशील गवाहों की पहचान गोपनीय रखने का निर्देश दिया है। उनके बयान और सबूतों को पूरी गोपनीयता के साथ रखा जाएगा। गवाहों के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने की संभावना भी जताई गई है, जहां वे गोपनीय तरीके से दस्तावेज और सबूत जमा कर सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि नोडल काउंसिल सिर्फ कोर्ट की सहायता करेगा और HPEC, कोर्ट तथा मामले से जुड़े पक्षों के बीच संपर्क का माध्यम नहीं बनेगा। दो वकील अमिकस क्यूरी नियुक्त सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सी. सोलोमन को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। वे दोनों पक्षों के बीच स्वतंत्र मध्यस्थ के तौर पर काम करेंगे। HPEC को एक मेंबर सेक्रेटरी नियुक्त करने और अपनी पहली रिपोर्ट जल्द से जल्द कोर्ट में पेश करने का निर्देश भी दिया गया है। 14 साल की प्रदर्शनकारी की सुरक्षा पर भी आदेश सुनवाई के दौरान 14 साल की एक प्रदर्शनकारी और उसके परिवार को मिल रही धमकियों का मामला भी उठा। कोर्ट को बताया गया कि लड़की और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी गई हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बच्ची और उसके परिवार की खतरे की स्थिति का आकलन कर जरूरी सुरक्षा देने का निर्देश दिया। पुलिस को धमकी और उत्पीड़न के आरोपों की जल्द जांच करने को भी कहा गया। दिल्ली पुलिस को अगली सुनवाई से पहले इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
Back to Top News
Top
September 16, 2026 at 6:50 AM
जंतर-मंतर हिंसा, सुप्रीम कोर्ट का जांच कमेटी बदलने से इनकार:कहा- छानबीन अभी शुरू हुई है, सवाल उठाना जल्दबाजी
Dainik Bhaskar