RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को लंदन के मंदिरों और गुरुद्वारे के दौरे के साथ अपने ब्रिटेन दौरे की शुरुआत की। भागवत ब्रिटेन में धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, रिसर्चर्स और अन्य प्रमुख लोगों से मिलेंगे। ब्रिटेन दौरे के समन्वयक संगठन इंटीग्रल UK के संयोजक रोहित अंबेकर बताया कि यहां भागवत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है का संदेश साझा करेंगे। लंदन का कार्यक्रम RSS की शताब्दी वर्ष से जुड़े आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है।भागवत 17 दिन के विदेश दौरे पर हैं। वे 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। इसके बाद वे कनाडा गए थे। हालांकि ब्रिटेन के 20 सिविल सोसाइटी संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की मांग की है। स्वामीनारायण मंदिर-ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे पहुंचे भागवत अंतरधार्मिक संवाद के तहत भागवत विल्सडन के श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा जा चुके हैं। उन्हें लंदन के एक जैन मंदिर में भी जाना है। ब्रिटेन दौरे का मुख्य कार्यक्रम रविवार को होगा। इसमें ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ थीम पर सामुदायिक नेताओं का स्वागत समारोह और ‘सभ्यतागत संवाद’ रखा गया है। यह कार्यक्रम ब्रिटेन में 1966 में स्थापित हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) UK ने शुरू किया है। इसे इंटीग्रल UK का समर्थन मिला है। पूरे ब्रिटेन के 310 से ज्यादा सामुदायिक संगठन और एसोसिएशन इसमें शामिल होने की उम्मीद है। ब्रिटेन के संगठनों ने RSS को तानाशाही-सैन्यवादी कहा विरोध कर रहे संगठनों ने ग्रेटर लंदन अथॉरिटी से RSS केकार्यक्रम के लिए कोई जगह नहीं देने को कहा है। उन्होंने ब्रिटेन के अधिकारियों से देश के बहुसांस्कृतिक समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है। इन संगठनों ने RSS को “तानाशाही और सैन्यवादी संगठन” बताया। उनका कहना है कि संगठन ने यूरोपीय फासीवाद से साफ तौर पर प्रेरणा ली थी। यह जानकारी ‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है। राउंड टेबल मीटिंग और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की भागवत बुधवार को लंदन पहुंचे थे। गुरुवार को उन्होंने ‘क्लोजडोर राउंड टेबल मीटिंग’ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कारोबार और राजनीति से जुड़े प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख लोगों की बड़ी सभा हुई। सुनील अंबेकर ने बताया कि ब्रिटेन के लोग RSS को समझने में काफी रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ने लोगों की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर बात की। कार्यक्रम में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिकों के साथ ब्रिटेन के नेता, संसद से जुड़े लोग, कारोबारी, करोड़पति और अरबपति और FTSE 100 कंपनियों और अन्य कॉरपोरेट्स से जुड़े लोग शामिल थे। हालांकि, प्रवक्ता ने कार्यक्रम में शामिल लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को गोपनीय तरीके से आयोजित किया गया था, ताकि चर्चा खुलकर हो सके। भागवत के दौरे पर उठी चिंताओं पर RSS का जवाब ब्रिटेन में कुछ सिविल सोसाइटी समूहों और सांसदों ने भागवत के दौरे को लेकर चिंता जताई है। इस पर सुनील अंबेकर ने कहा, “हम शांति, एकीकरण और एकता के लिए यहां हैं। इसलिए हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं। लोकतंत्र में अलग-अलग आवाजें हो सकती हैं। ऐसी आवाजें उठना सामान्य बात है।” उन्होंने कहा कि RSS को लेकर कई गलतफहमियां हैं, क्योंकि बुनियादी समझ में कमी है। उनके मुताबिक, “भारत किसी राष्ट्र-राज्य की राजनीतिक अवधारणा जैसा नहीं है। यह एक सांस्कृतिक अवधारणा है।” सुनील अंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व कोई स्थिर अवधारणा नहीं है। इसमें हर तरह के धर्म और सभी धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास की बात है। उन्होंने कहा, “यही हिंदुत्व है, यही भारत है। मुझे लगता है कि यह दौरा इन विचारों को साफ करने में मदद करेगा।” रविवार को सार्वजनिक संबोधन RSS प्रमुख का रविवार को प्रवासी भारतीय समुदाय को दिया जाने वाला सार्वजनिक संबोधन लाइव प्रसारित किए जाने की उम्मीद है। RSS प्रमुख के साथ ब्रिटेन के मीडिया के लिए कोई बातचीत नहीं रखी गई है। भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ----------------------------- भागवत के विदेश दौरे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता: हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है। पूरी खबर पढ़ें… कनाडा में भागवत बोले- मदद करना भारत की परंपरा: 'ये मेरा, वह तुम्हारा' की सोच से ऊपर उठना होगा टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि मुश्किल वक्त में दूसरों की मदद करना भारत की पुरानी परंपरा रही है। दुनिया में कहीं भी संकट आया और भारत से मदद मांगी गई तो भारत ने कभी पीछे हटकर इनकार नहीं किया। कई बार भारत ने बिना मदद मांगे भी दूसरों की सहायता की है। पढ़ें पूरी खबर… भागवत बोले- मुसलमानों को भारत से निकालना हिंदुत्व नहीं:धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक; सभी रास्ते ईश्वर तक जाते हैं RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा, 'अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। हिंदू होने का मतलब यह मानना है कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की गरिमा एक समान है।' उन्होंने यह बात शनिवार को न्यूयॉर्क के ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में कही। पूरी खबर पढ़ें…