केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक करोड़ रुपए की रिश्वत मामले में CGST विभाग के सुपरिंटेंडेंट और कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान सुपरिंटेंडेंट पंकज कुमार और कंसल्टेंट प्रसाद कुमार स्वामी के रूप में हुई है। सुपरिंटेंडेंट पंकज कुमार ने शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपए की रिश्वत CGST कंसल्टेंट प्रसाद कुमार स्वामी को देने को कहा था। CBI ने गुरुवार को दोनों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। जानकारी शुक्रवार को सामने आई है। CBI के मुताबिक, मामला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के न्यू पनवेल का है। यहां एक निजी रियल एस्टेट कंपनी सेक्टर-17 में दो इमारतों का पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) कर रही है। इन इमारतों में CGST और सेंट्रल एक्साइज, रायगढ़ कमिश्नरेट के स्वामित्व वाले 24 फ्लैट भी शामिल हैं। NOC-फ्लैट सौंपने के बदले 3 हिस्सों में मांगी रकम CBI के मुताबिक, एक निजी रियल एस्टेट कंपनी के प्रोजेक्ट हेड ने CGST सुपरिंटेंडेंट पंकज कुमार के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप है कि 24 फ्लैटों को पुनर्विकास के लिए सौंपने और NOC जारी करने के बदले अधिकारी ने एक करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी। शिकायत के बाद CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि भी हुई। CBI के अनुसार, 10 सितंबर को आरोपी अधिकारी ने रिश्वत की रकम का ब्योरा बताया। इसमें 10 लाख रुपए कैश, 20 लाख रुपए एक फ्लैट की डाउन पेमेंट और बाकी 70 लाख रुपए DG HRD CGST, नई दिल्ली के अन्य अधिकारियों के लिए देने की बात कही गई। दोनों को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया CBI ने गुरुवार को जाल बिछाया। अधिकारी ने शिकायतकर्ता से 10 लाख रुपए CGST कंसल्टेंट प्रसाद कुमार स्वामी को देने को कहा। कार्रवाई के दौरान CBI ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें 2 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। भ्रष्टाचार कानून में 7 साल तक की सजा भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत रिश्वत लेने वाले सरकारी कर्मचारी को 3 से 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। रिश्वत देना भी अपराध है। दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को मजबूरी में रिश्वत देनी पड़ी और वह 7 दिनों के अंदर इसकी जानकारी अधिकारियों को दे देता है, तो उसे कानूनी सुरक्षा मिल सकती है। CBI का 'ट्रैप' कैसे काम करता है जब कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो शिकायतकर्ता CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत करता है। शिकायत की जांच के बाद CBI ट्रैप की योजना बनाती है। इसके तहत शिकायतकर्ता को तय रकम आरोपी को देने के लिए कहा जाता है। अक्सर नोटों पर खास केमिकल लगाया जाता है। आरोपी के रिश्वत लेते ही CBI टीम उसे पकड़ लेती है और केमिकल टेस्ट से रिश्वत लेने की पुष्टि की जाती है।