अश्लीलता किसी लेख, तस्वीर या दूसरी चीज़ की ख़ूबी नहीं होती. यह केवल उस व्यक्ति के मन में होती है, जो उस पर अश्लील होने का आरोप लगाता है. रघुनाथ धोंडो कर्वे की पत्रिका ‘समाजस्वास्थ्य’ में यह बात एक बॉक्स में लिखी होती थी. इसके नीचे पत्रिका का बाक़ी लेख होता था.
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October 17, 2026 at 4:37 AM
गर्भनिरोधक का प्रचार और यौन शिक्षा: रघुनाथ धोंडो कर्वे 'अश्लीलता' को यूं करते थे ख़ारिज
BBC Hindi
Excerpt from BBC Hindi.