सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मणिपुर के राहत शिविरों में हुई संदिग्ध मौतों और यौन उत्पीड़न के मामलों पर चिंता जताई। कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए मणिपुर के मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई सभी 25 संदिग्ध मौतों पर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। रिपोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौत के कारणों से जुड़े दस्तावेज भी शामिल करने को कहा गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत बोले, अपने मुख्य सचिव से कहिए कि कोर्ट को आदेश देने के लिए मजबूर न करें। हमें बताइए कि आपने क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा- मौतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया। कोर्ट ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने मणिपुर के एडवोकेट जनरल से भी पूछा कि 4 जुलाई को समिति ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की 25 मौतों को लेकर जो जानकारी मांगी थी, उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। 8 जिलों के राहत शिविरों में 640 मौतें दर्ज की गई कोर्ट के आदेश में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, 8 जिलों के राहत शिविरों में 640 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से सिर्फ 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया, जबकि इन मामलों में आपराधिक केस भी दर्ज किए गए थे। कोर्ट ने सवाल किया कि जब इन मौतों के मामलों में आपराधिक केस दर्ज थे, तो सिर्फ 20 लोगों का पोस्टमार्टम क्यों कराया गया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि कई मामलों में सिर्फ 20 हजार से 30 हजार रुपए का मुआवजा क्यों दिया गया। कोर्ट ने कहा- संदिग्ध मौतों के मामलों में FIR दर्ज कराई जाए सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि सभी संदिग्ध मौतों के मामलों में FIR दर्ज कराई जाए और मौत के कारणों की उचित जांच सुनिश्चित की जाए। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि 8 जिलों में 42 स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाए गए हैं। 3,020 मामलों की जांच चल रही है। इनमें 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। इसके अलावा 1,135 मामलों की जांच अभी जारी है और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है। खबर लगातार अपडेट हो रही है….