DRDO का लक्ष्य अब इस तकनीक को प्रयोगशाला और परीक्षणों से आगे ले जाकर उद्योग के जरिए उत्पादन के स्तर तक पहुंचाना है. इससे भविष्य में सेना को ड्रोन और UAV के खिलाफ एक विकल्प मिल सकता है.