इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला बरेली हिंसा मामले में अहम माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने धार्मिक आस्था के नारों और हिंसा या विद्रोह के लिए उकसाने वाले नारों के बीच स्पष्ट अंतर को रेखांकित किया है.