डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान को केवल शासन का दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना था. UCC की बहस को भी इसी दृष्टि से देखने की जरूरत है.