ग्राउंड वाटर लगातार नीचे जा रहा है. इसका असर सिर्फ किसानों की सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा. बिजली-डीजल खर्च, खेती की लागत, खाने की कीमत, पीने का पानी और शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खतरा बढ़ सकता है.