कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने समर्थन वाले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन आंदोलन से किसी भी विदेशी कनेक्शन के आरोप खारिज किए हैं। उन्होंने कहा कि उनका फैसला उपलब्ध डेटा, आंदोलन के सदस्यों से बातचीत और जमीन पर दिखी स्थिति के आधार पर था। वांगचुक ने यह बात पत्रकार प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में कही। उनसे आंदोलन की फंडिंग और पाकिस्तान समेत दूसरे देशों से कथित कनेक्शन को लेकर सवाल पूछे गए थे। जून से जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों में वांगचुक अहम हिस्सा थे। इन प्रदर्शनों के बाद जुलाई में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। वांगचुक से पूछा- क्या आप सीआईए हैं प्रखर गुप्ता ने वांगचुक से पूछा, “क्या आप सीआईए हैं? मुझे नहीं पता कि इसका और कैसे जवाब दूं। लेकिन यह वही काम है, जो कोई सीआईए का व्यक्ति करता है। बहुत ज्यादा परिष्कृत तरीके से…” वांगचुक ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, “अगर मैं हूं, तो मुझे अभी तक इसका पता नहीं चला है। हो सकता है कि वे लोगों को इतनी परिष्कृत तरीके से नौकरी पर रखते हों कि उस व्यक्ति को अपनी मौत के 500 साल बाद तक भी इसका पता न चले।” 94% फॉलोअर्स भारत से होने का दावा सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की शिक्षा संबंधी योग्यता और पाकिस्तान, बांग्लादेश या अमेरिका से कथित संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर वांगचुक ने कहा कि उन्होंने खुद कोई विस्तृत जांच नहीं की थी। उन्होंने कहा, “मैंने कोई परिष्कृत रिसर्च सॉफ्टवेयर नहीं चलाया था।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका आकलन उन्हें दिखाए गए डेटा पर आधारित था, तो उन्होंने कहा कि ऐसा ही था। वांगचुक ने बताया, “हां, यह डेटा था। हमारे अधिकारी, जिनमें उपराज्यपाल भी शामिल हैं, कह रहे थे कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अमेरिका में उनके बहुत ज्यादा फॉलोअर्स हैं। मुझे इसके बारे में पता नहीं था। इसलिए मैंने उनके फॉलोअर्स का एनालिटिक्स देखा। पता चला कि उनके 94% फॉलोअर्स भारत से थे और केवल 6% दूसरे देशों से।” ‘6% विदेशी फॉलोअर्स को हाई रिस्क नहीं माना’ वांगचुक ने कहा, “मैंने मजाक में सोचा कि भारत वास्तव में विश्वगुरु है। भारत ने इसकी शुरुआत की और अब पाकिस्तान में भी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बन रही है। कम से कम विरोध प्रदर्शनों के मामले में भारत आगे तो है।” उन्होंने कहा, “6% विदेशी फॉलोअर्स को हाई रिस्क वाला फॉलोअर्स नहीं माना जा सकता। अगर 30% विदेशी और 70% भारतीय फॉलोअर्स होते, तो मेरे लिए खतरे की घंटी बजती। लेकिन 6% विदेशी और 94% भारतीय फॉलोअर्स, साथ ही जमीन पर दिख रही स्थिति से मुझे समझ आया कि ऐसा कुछ नहीं है।” वांगचुक ने बताया कि इसके बाद उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से फोन पर बात की और सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान उन्हें बिल्कुल नहीं लगा कि वे किसी विदेशी ताकत के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने कहा, “आपको उनके बर्गर खाने या उनकी पिछली नौकरियों से समस्या हो सकती है, लेकिन उन्हें कोई बाहरी ताकत निर्देश नहीं दे रही थी। यह उनकी बातचीत और एनालिटिक्स से साफ था।” ‘मुझे आंदोलन में कुछ गलत नहीं लगा’ वांगचुक ने कहा, “इसी आधार पर और यह देखने के बाद कि आंदोलन में कोई गलत मंशा नहीं थी, मैंने उनका समर्थन करने का फैसला किया। खासकर इसलिए, क्योंकि वे कह रहे थे कि दिल्ली पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।” उन्होंने कहा, “मैंने दो काम किए। मैंने कहा कि मैं उनके साथ जुडूंगा और अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो मैं भूख हड़ताल करूंगा। मैंने उन्हें यह सुरक्षा दी, क्योंकि मुझे भरोसा था कि इसमें कुछ गड़बड़ नहीं है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या डेटा के स्क्रीनशॉट देखकर किसी व्यक्ति को भरोसेमंद मानना और सार्वजनिक तौर पर उसके अभियान से जुड़ना पर्याप्त था, तो वांगचुक ने कहा कि वे आगे की जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “पीछे मुडकर देखने पर मुझे नहीं लगता कि उन्हें किसी ने पैसे दिए थे। लेकिन जैसा आपने विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड को लेकर कहा, मैं किसी भी जांच के पूरे समर्थन में हूं।” वांगचुक ने कहा, “जो भी नेतृत्व करता है, उसे झूठ नहीं बोलना चाहिए। अगर वे बड़े दावे करते हैं और वे दावे छोटे साबित होते हैं, तो इसकी जांच होनी चाहिए।” 20 बच्चों की मौत को बताया आंदोलन का बडा मुद्दा वांगचुक ने कहा कि उस समय जमीन पर जो दिख रहा था और यह सुनने के बाद कि इस मुद्दे को लेकर 20 बच्चों ने आत्महत्या की है, उनका ध्यान आंदोलन के मुख्य कारण पर था। उन्होंने कहा, “यही वह मुद्दा था, जिसके लिए वे आवाज उठा रहे थे। 20 बच्चों का अपनी जान देना एक बडी और अनदेखी त्रासदी है। अगर किसी दूसरे संदर्भ में एक व्यक्ति की मौत हो जाए, तो पूरा देश उठ खडा होता है।” उन्होंने अरब स्प्रिंग के मोहम्मद बुआजीजी का उदाहरण देते हुए कहा, “एक व्यक्ति के बलिदान ने आठ देशों को बदल दिया। यहां 20 बच्चों की मौत हो गई और उन्हें बिना किसी सम्मान के भुलाया जा रहा है।” वांगचुक ने कहा, “इससे मुझे बहुत दुख हुआ। मैं शिक्षा नीति से जुडा हूं और ये उसकी दुखद झलकियां हैं, इसलिए इस घटना ने मुझे गहराई से प्रभावित किया।” उन्होंने कहा, “उस मुद्दे के सामने छोटी बातें मायने नहीं रखती थीं। वे एक वास्तविक चिंता को लेकर आवाज उठा रहे थे।” ‘मेरा समर्थन मुद्दे के लिए था’ जब वांगचुक से पूछा गया कि उनका समर्थन संगठन या उससे जुड़े लोगों के बजाय आंदोलन के मुद्दे के लिए था, तो उन्होंने साफ जवाब दिया, “हां, मुद्दे के लिए।” देश-दुनिया की ताजा खबरें, ब्रेकिंग हेडलाइंस और रियल टाइम अपडेट्स के लिए डीबी डिजिटल से जुडे रहें। राजनीति, सरकारी नीतियों, अपराध, मौसम, देश के बडे घटनाक्रम और कर्नाटक बंद की लाइव खबरें पढते रहें।