सितंबर तिमाही में विदेशी निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू वाली 53 भारतीय कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है. इस बिकवाली से बड़े शेयरों की भविष्य की ग्रोथ पर सवाल उठने लगे हैं.