पूरे साल में सिर्फ एक रोज ही शरद पूर्णिमा का चांद सोलह कलाओं वाला होता है. कहते हैं चन्द्रमा से इस रोज अमृत बरसता है. इसलिए शरद अमरत्व का प्रतीक भी है. इसे 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहते हैं.