पश्चिम बंगाल में करीब 3 3 लाख अस्थायी और ठेका सरकारी कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है. इनके नाम राज्य की SIR लिस्ट से गायब हैं. इस कारण उन्हें तत्काल नौकरी से निकाले जाने का डर सता रहा है.