हम पुरस्कार मिलने वाला साल याद रखते हैं, लेकिन धैर्य सीखने वाले साल भूल जाते हैं. मंज़िल पर पहुंचने की खुशी मनाते हैं, लेकिन वहां तक पहुंचाने वाले साधारण दिनों को महत्व नहीं देते.