वैसे पारसियों के भारत के साथ व्यापारिक और सामाजिक संबंध पहले से थे. लेकिन एक मान्यता के मुताबिक़, जब ईरान पर अरबों का हमला हुआ तो पारसी “अपने धर्म को बचाने” के लिए सबसे पहले भारत में दीव पहुंचे.